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४: श्री १००८ अभिनन्दन नाथ भगवान का परिचय
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भगवान का चिन्ह |
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बंदर |
देवगति से पूर्व भव का नाम |
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महाबल |
कहां से आये |
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विजय |
गर्भ कल्याण तिथि |
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बैशाख शुक्ल छठ |
जन्म कल्याण की तिथि |
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माघ कृष्णा बारस |
जन्म नगरी |
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अयोध्या |
वंश |
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इक्ष्वाकु |
पिता का नाम |
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संवर |
माता का नाम |
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सिद्धार्था |
आयु |
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पचास लाख पूर्व |
ऊंचाई |
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साढ़े तीन सौ धनुष |
वर्ण |
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स्वर्ण |
वैराग्य का कारण |
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गंघर्व नगर नाश |
दीक्षा की तिथि |
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माघ शुक्ला बारस |
दीक्षा का समय |
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पूर्वान्ह |
दीक्षा नगरी |
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अयोध्या |
दीक्षा वन |
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अग्रोद्यान |
दीक्षा पालकी |
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हस्तचित्रा |
दीक्षा वृक्ष |
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असन वृक्ष |
दीक्षा समय उपवास |
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तृतीय उपवास |
सह दीक्षित |
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एक हजार |
प्रथम आहार नगरी |
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साकेता |
प्रथम आहार किसने दिया |
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इन्द्रदत्त |
प्रथम आहार में क्या दिया |
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गौ क्षीर से बने पकवान |
छद्मस्थकाल |
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अठ्ठारह वर्ष |
केवल ज्ञान तिथि |
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पौष शुक्ल चौदस |
केवल ज्ञान समय |
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अपरांह |
केवल ज्ञान का स्थान |
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अयोध्या |
केवल ज्ञान वन |
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उग्र वन |
केवल ज्ञान वृक्ष |
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शाल |
समवशरण का व्यास |
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साढ़े दस योजन |
समवशरण में कुल मुनियों की संख्या |
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तीन लाख |
समवशरण में कुल आर्यिकाओं की
संख्या |
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तीन लाख बीस हजार छः सौ |
कुल गणधर |
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एक सौ तीन |
मुख्य गणधर का नाम |
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बज्र चमर |
मुख्य आर्यिका नाम |
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नाम मेरुषेणा |
कुल श्रावक |
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तीन लाख |
कुल श्राविका |
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पांच लाख |
मुख्य श्रोता |
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मित्रभाव |
केवल ज्ञान के पूर्व उपवास |
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बेला दो उपवास |
कितने यतिगण सिद्ध हुए |
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दो लाख अस्सी हजार एक सौ |
अनुबद्ध केवली की कुल संख्या |
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चौरासी |
केवली काल का समय |
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अठ्ठारह वर्ष आठ पूर्व कम एक लाख पूर्व |
मोक्ष की तिथि |
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बैशाख शुक्ल छठ |
मोक्ष का समय |
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अपरांह |
मोक्ष का स्थान |
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सम्मेद शिखर (आनन्दकूट) |
साथ में मोक्ष जाने वालों की
संख्या |
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एक हजार |
योग निवृत्ति |
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एक मास पूर्व |
मोक्ष के समय का आसन |
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खड्गासन |
भगवान के समय चक्रवर्ती |
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कोई नहीं |
भगवान के समय बलदेव |
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कोई नहीं |
भगवान के समय नारायण |
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कोई नहीं |
भगवान के समय प्रतिनारायण |
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कोई नहीं |
भगवान के समय रुद्र |
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कोई नहीं |
भगवान के समय यक्ष |
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यक्षेश्वर |
भगवान के समय यक्षिणीयां |
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ब्रजश्रंखला |
भगवान का विशेष पद |
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मण्डलीक राजा |
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